श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.20.25 
পবন-কারণে যেন শুষ্ক তৃণ চলে
জীবের সকল ধর্ম তোর শক্তি-বলে”
पवन-कारणे येन शुष्क तृण चले
जीवेर सकल धर्म तोर शक्ति-बले”
 
 
अनुवाद
"जैसे सूखी घास का एक तिनका हवा में उड़ता है, वैसे ही सभी जीव आपकी शक्तियों के बल पर कार्य करते हैं।"
 
"Just as a blade of dry grass blows in the wind, so all beings function by the power of your powers."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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