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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 24
श्लोक
2.20.24
হাসিঽ বলে বিশ্বম্ভর,—“মুরারি এ কেন?”
মুরারি বলযে,—“প্রভু লওযাইলে যেন
हासिऽ बले विश्वम्भर,—“मुरारि ए केन?”
मुरारि बलये,—“प्रभु लओयाइले येन
अनुवाद
विश्वम्भर मुस्कुराये और बोले, “मुरारी, तुमने ऐसा क्यों किया?” मुरारी ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैंने आपके आदेशानुसार कार्य किया है।
Vishvambhara smiled and said, “Murari, why did you do this?” Murari replied, “O Lord, I have acted as you commanded.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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