श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.20.19 
চৈতন্য পাইযা গুপ্ত করযে ক্রন্দন
ঽনিত্যানন্দঽ বলিঽ শ্বাস ছাডে ঘন ঘন
चैतन्य पाइया गुप्त करये क्रन्दन
ऽनित्यानन्दऽ बलिऽ श्वास छाडे घन घन
 
 
अनुवाद
जागते ही मुरारी रोने लगे। वे बार-बार गहरी साँस लेकर पुकारने लगे, "नित्यानंद!"
 
As soon as he woke up, Murari began to cry. He took deep breaths and called out, "Nityananda!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)