श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  2.20.158 
জয জয জগন্নাথ-মিশ্রের নন্দন
তোর নিত্যানন্দ হৌ মোর প্রাণ-ধন
जय जय जगन्नाथ-मिश्रेर नन्दन
तोर नित्यानन्द हौ मोर प्राण-धन
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र के पुत्र की जय हो! आपका नित्यानंद ही मेरा जीवन और धन हो।
 
Victory to the son of Jagannatha Mishra! May your eternal bliss be my life and wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)