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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 157
श्लोक
2.20.157
জন্ম জন্ম নিত্যানন্দ হৌ মোর পতি
যাঙ্হার প্রসাদে হৈল চৈতন্যেতে রতি
जन्म जन्म नित्यानन्द हौ मोर पति
याङ्हार प्रसादे हैल चैतन्येते रति
अनुवाद
भगवान नित्यानंद जन्म-जन्मांतर तक मेरे स्वामी रहें। उनकी कृपा से मैं भगवान चैतन्य की ओर आकर्षित हुआ हूँ।
Lord Nityananda has been my master for many lifetimes. By his grace, I have been drawn to Lord Chaitanya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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