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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 155
श्लोक
2.20.155
হেন-মতে মুরারি গুপ্তের অনুভাব
আমি কি বলিব, ব্যক্ত তাঙ্হার প্রভাব
हेन-मते मुरारि गुप्तेर अनुभाव
आमि कि बलिब, व्यक्त ताङ्हार प्रभाव
अनुवाद
मुरारी गुप्त की महिमा ऐसी ही है। और क्या कहूँ? उनकी महिमा तो सर्वविदित है।
Such is the glory of Murari Gupta. What more can I say? His greatness is well known.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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