श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.20.154 
মুরারি গুপ্তেরে প্রভু সান্ত্বনা করিযাচলিলা
আপন-ঘরে হরষিত হৈযা
मुरारि गुप्तेरे प्रभु सान्त्वना करियाचलिला
आपन-घरे हरषित हैया
 
 
अनुवाद
मुरारी गुप्त को सान्त्वना देकर भगवान प्रसन्नतापूर्वक अपने घर लौट गये।
 
After consoling Murari Gupta, the Lord returned happily to his home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)