অষ্ট সিদ্ধি-যুক্ত—চৈতন্যেতে ভক্তি-শূন্য
কভু যেন না দেখোঙ্ সে পাপী হীন-পুণ্য
अष्ट सिद्धि-युक्त—चैतन्येते भक्ति-शून्य
कभु येन ना देखोङ् से पापी हीन-पुण्य
अनुवाद
मैं कभी भी ऐसे पापी का मुख न देखूं जो भगवान चैतन्य के प्रति भक्ति और धर्म से रहित हो, भले ही वह आठ योगसिद्धियों से संपन्न क्यों न हो।
May I never see the face of a sinner who is devoid of devotion and righteousness towards Lord Chaitanya, even if he is endowed with the eight yogic powers.
तात्पर्य
पापी और निष्ठाहीन प्राणी भगवान् चैतन्य की सेवा से विमुख रहते हैं। यदि ऐसे लोग आठ प्रकार के योग में सिद्धि प्राप्त करते भी हैं, तो भी ऐसे पापियों के मुख नहीं देखने चाहिए। आध्यात्मिक गुरु निश्चित ही श्री चैतन्य के अति प्रिय सेवक होते हैं। वैष्णव भक्त, जो आध्यात्मिक गुरु के हृदय से भिन्न नहीं हैं, आठ प्रकार की सिद्धियों की निंदा करते हैं। वे विशुद्ध वैष्णवों के आध्यात्मिक गुरु होते हैं। अनधिकृत और वैष्णव-विरोधी संप्रदायों से अलग रहना चाहिए, लेकिन उन्हें बाह्य रूप से आदर दिया जाना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥