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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 146
श्लोक
2.20.146
অতএব নিন্দক-সন্ন্যাসীবাটোযার
বাটোযার হৈতে ও অনন্ত দুরাচার
अतएव निन्दक-सन्न्यासीबाटोयार
बाटोयार हैते ओ अनन्त दुराचार
अनुवाद
अतः इन दोनों में से, निन्दक संन्यासी चोर से अनन्त गुना अधिक पापी है।
Therefore, of these two, the blasphemous Sanyasi is infinitely more sinful than the thief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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