श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  2.20.143 
ভালরে আইসে লোক তপস্বী দেখিতে
সাধু-নিন্দাশুনিঽ মরিঽ যায ভাল-মতে
भालरे आइसे लोक तपस्वी देखिते
साधु-निन्दाशुनिऽ मरिऽ याय भाल-मते
 
 
अनुवाद
लोग सद्भक्ति से संन्यासियों के पास जाते हैं, किन्तु जब वे उन्हें संतों की निन्दा करते सुनते हैं, तो उनका विनाश हो जाता है।
 
People approach the monks with sincere devotion, but when they hear them criticizing the saints, they are destroyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)