श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.20.141 
হরন্তি দস্যবো ঽকুট্যাṁ বিমোহ্যাস্ত্রৈর্ নৃণাṁ ধনম্
চারিত্রৈর্ অতি-তীক্ষ্নাগ্রৈর্ বাদৈর্ এবṁ বক-ব্রতাঃ
हरन्ति दस्यवो ऽकुट्याꣳ विमोह्यास्त्रैर् नृणाꣳ धनम्
चारित्रैर् अति-तीक्ष्नाग्रैर् वादैर् एवꣳ बक-व्रताः
 
 
अनुवाद
"लुटेरे एकांत स्थानों में लोगों को हथियारों से डराकर उनका धन चुराते हैं, जबकि पाखंडी लोग हृदय-भेदी शब्दों से उन्हें भ्रमित करके उनका धन चुराते हैं।"
 
"Robbers steal people's wealth by threatening them with weapons in secluded places, while hypocrites steal their wealth by misleading them with heart-piercing words."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd