श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  2.20.140 
ইন্ থে নারদীয পুরাণ ইত্ ইস্ স্ততেদ্:
প্রকটṁ পতিতঃশ্রেযান্ য একো যাত্য্ অধঃ স্বযম্
বক-বৃত্তিঃ স্বযṁ পাপঃ পাতযত্য্ অপরান্ অপি
इन् थे नारदीय पुराण इत् इस् स्ततेद्:
प्रकटꣳ पतितःश्रेयान् य एको यात्य् अधः स्वयम्
बक-वृत्तिः स्वयꣳ पापः पातयत्य् अपरान् अपि
 
 
अनुवाद
“एक पतित व्यक्ति एक पापी पाखंडी से श्रेष्ठ है क्योंकि वह अकेले नरक में जाता है, जबकि पाखंडी दूसरों को अपने साथ नरक में ले जाता है।
 
“A fallen man is superior to a sinful hypocrite because he goes to hell alone, while the hypocrite takes others to hell with him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)