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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 134
श्लोक
2.20.134
সṁহারে ও গৌরচন্দ্র ত্রিলোচন-রূপে
আপনারে স্তুতি করে আপনার মুখে
सꣳहारे ओ गौरचन्द्र त्रिलोचन-रूपे
आपनारे स्तुति करे आपनार मुखे
अनुवाद
त्रिनेत्र शिव के रूप में गौरचन्द्र संहार करते हैं। वे स्वयं अपनी स्तुति करते हैं।
Gaurachandra, in the form of the three-eyed Shiva, kills. He praises himself.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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