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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 131
श्लोक
2.20.131
যে প্রসাদ মুরারি গুপ্তেরে প্রভু করে
তাহা বাঞ্ছে রমা, অজ, অনন্ত, শঙ্করে
ये प्रसाद मुरारि गुप्तेरे प्रभु करे
ताहा वाञ्छे रमा, अज, अनन्त, शङ्करे
अनुवाद
भगवान ने मुरारीगुप्त पर जो कृपा की, उसकी कामना लक्ष्मी, ब्रह्मा, अनंत और शंकर करते हैं।
Lakshmi, Brahma, Anant and Shankar desire the grace that God bestowed upon Murarigupta.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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