श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.20.13 
সম্ভ্রমে চলিলা গুপ্ত সভয হরিষে
শযন করিলা গিযা আপনার বাসে
सम्भ्रमे चलिला गुप्त सभय हरिषे
शयन करिला गिया आपनार वासे
 
 
अनुवाद
मुरारी गुप्ता खुशी और चिंता दोनों महसूस करते हुए चले गए। वे घर गए और आराम करने लगे।
 
Murari Gupta left feeling both happy and worried. He went home and rested.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)