श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.20.128 
“মোর মাথা খাও গুপ্ত, মোর মাথা খাও
যদি আর বার দেহ ছাডিবারে চাও”
“मोर माथा खाओ गुप्त, मोर माथा खाओ
यदि आर बार देह छाडिबारे चाओ”
 
 
अनुवाद
“गुप्ता, तुम मेरा सिर खाओगे, यदि तुम कभी भी अपना शरीर त्यागने की इच्छा करोगे तो तुम मेरा सिर खाओगे।”
 
“Gupta, you will eat my head, if you ever wish to leave your body you will eat my head.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)