vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
»
श्लोक 128
श्लोक
2.20.128
“মোর মাথা খাও গুপ্ত, মোর মাথা খাও
যদি আর বার দেহ ছাডিবারে চাও”
“मोर माथा खाओ गुप्त, मोर माथा खाओ
यदि आर बार देह छाडिबारे चाओ”
अनुवाद
“गुप्ता, तुम मेरा सिर खाओगे, यदि तुम कभी भी अपना शरीर त्यागने की इच्छा करोगे तो तुम मेरा सिर खाओगे।”
“Gupta, you will eat my head, if you ever wish to leave your body you will eat my head.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×