श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.20.127 
কোলে করিঽ মুরারিরে প্রভু বিশ্বম্ভর
হস্ত তুলিঽ দিল নিজ শিরের উপর
कोले करिऽ मुरारिरे प्रभु विश्वम्भर
हस्त तुलिऽ दिल निज शिरेर उपर
 
 
अनुवाद
तब भगवान विश्वम्भर ने मुरारी को गले लगा लिया और अपना हाथ मुरारी के सिर पर रख दिया।
 
Then Lord Vishvambhar embraced Murari and placed his hand on Murari's head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)