श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  2.20.125 
তুমি গেলে কাহারে লৈযা মোর খেলা?
হেন বুদ্ধি তুমি কাঽর স্থানে বাশিখিলা?
तुमि गेले काहारे लैया मोर खेला?
हेन बुद्धि तुमि काऽर स्थाने वाशिखिला?
 
 
अनुवाद
"तुम चले गए तो मैं किसके साथ मौज-मस्ती करूँगी? तुम्हें ये विचार किसने दिए?"
 
"If you're gone, who am I going to hang out with? Who gave you these ideas?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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