श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.20.113 
আনিযা থুইল কাতি গৃহের ভিতরে
“নিশায এডিব দেহ হরিষ অন্তরে”
आनिया थुइल काति गृहेर भितरे
“निशाय एडिब देह हरिष अन्तरे”
 
 
अनुवाद
जब वह उस हेलिकॉप्टर को घर के अंदर ले आया और उसे छिपा दिया, तो उसने सोचा, "आज रात मैं खुशी-खुशी अपना शरीर त्याग दूंगा।"
 
When he brought that helicopter inside the house and hid it, he thought, "I will gladly give up my body tonight."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)