श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.20.10 
কোথা তুমি শিখাইবা, যে না ইহা জানে
ব্যবহারে হেন ধর্ম তুমি লঙ্ঘঽ কেনে?”
कोथा तुमि शिखाइबा, ये ना इहा जाने
व्यवहारे हेन धर्म तुमि लङ्घऽ केने?”
 
 
अनुवाद
“तुम्हें उन लोगों को सिखाना चाहिए जो ये बातें नहीं जानते, तो फिर तुम अपने आचरण से इन सिद्धांतों का उल्लंघन क्यों कर रहे हो?
 
“You should teach those who do not know these things, so why are you violating these principles by your conduct?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)