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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 99
श्लोक
2.19.99
দেখা নাহি পায যত অভক্ত সন্ন্যাসী
তার সাক্ষী যতেক সন্ন্যাসী কাশী-বাসী
देखा नाहि पाय यत अभक्त सन्न्यासी
तार साक्षी यतेक सन्न्यासी काशी-वासी
अनुवाद
इसीलिए अभक्त संन्यासी भगवान के दर्शन नहीं कर पाते। काशी के संन्यासी इसके प्रमाण हैं।
This is why non-devotee monks are unable to see God. The monks of Kashi are proof of this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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