भगवान व्यभिचारियों और शराबियों पर दया करते हैं, किन्तु वे ईशनिंदा करने वालों का भी विनाश कर देते हैं, भले ही वे वेदान्त में पारंगत क्यों न हों।
The Lord has mercy on adulterers and drunkards, but He destroys even those who blaspheme, even if they are well versed in Vedanta.
तात्पर्य
वे साधारण लोग जो भौतिक सुखों में लिप्त रहते हैं और सांसारिक नैतिकता का पालन करते हैं, वे नास्तिकों को शराबी और स्त्रीलंपट लोगों से ज़्यादा सम्मान देते हैं, लेकिन सर्वोच्च स्वतंत्र प्रभु, जो जीवों के प्रति अत्यंत दयालु है, उनके इस विचार को स्वीकार नहीं करता, जो बाहरी धारणा से उत्पन्न हुआ है। यह समझते हुए कि वैष्णवों के प्रति उदासीन वेदांतियों की धारणा भक्ति सेवा के बिल्कुल विपरीत है, वह उसका खंडन करता है। और वह उनकी योग्यताओं के अनुसार कमज़ोर लोगों, स्त्रीलंपट लोगों और शराबियों पर करुणा दिखाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥