वामपथी शब्द एक वामचारि को दर्शाता है, या वह जो वैदिक सिद्धांतों के विपरीत कार्य करता है। आचार-भेद तंत्र के अनुसार: ''एक वामचारि का मुख्य कर्तव्य मदिरापान करना, मांस खाना, मछली खाना, यौन सुख लेना, स्त्रियों के साथ संगति करना, अपनी पत्नी के मासिक धर्म के स्राव से अन्य महिलाओं की पूजा करना, और मदिरा जैसे नशीले पदार्थों को लेना और वितरित करना है। उसके बाद उसे खुद को एक महिला समझना चाहिए और हाथ में मदिरा का पात्र धारण करते हुए सर्वोच्च स्त्री शक्ति की पूजा करनी चाहिए।'' उसे अपने माथे पर सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए और हाथ में मदिरा का पात्र धारण करते हुए अपने गुरु और आराध्य पर ध्यान करना चाहिए। उसे अपने हाथ में धारण किए मदिरा के पात्र को मंत्रों का पाँच बार पाठ करते हुए प्रार्थना अर्पित करनी चाहिए, जिसके बाद हर बार उस मदिरा का एक घूँट पीना चाहिए। फिर उसे तब तक मदिरापान जारी रखना चाहिए जब तक उसकी सभी इंद्रियाँ उत्तेजित न हो जाएँ। इसके बाद उसे शांति-स्तोत्र जैसे शांति का आह्वान करने वाली प्रार्थनाओं का पाठ करना चाहिए। अधिक विस्तृत निर्देशों के लिए प्राण-तोषणी-तंत्र और कुलार्णव पर चर्चा की जानी चाहिए।
