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श्लोक 2.19.74  |
সন্ন্যাসী বলযে,—“হেন কাল সে হৈল
শিশুর অগ্রেতে আমি কিছু না জানিল |
सन्न्यासी बलये,—“हेन काल से हैल
शिशुर अग्रेते आमि किछु ना जानिल |
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| अनुवाद |
| संन्यासी ने कहा, "अब समय आ गया है कि मैं एक बालक के सामने अज्ञानी दिखूँ। |
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| The monk said, “Now the time has come for me to appear ignorant in front of a child. |
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