श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.19.66 
ঽধন-পুত্র পাই গঙ্গা-স্নান হরি-নামেঽ
শুনিযা চলযে লোক বেদের কারণে
ऽधन-पुत्र पाइ गङ्गा-स्नान हरि-नामेऽ
शुनिया चलये लोक वेदेर कारणे
 
 
अनुवाद
वेदों में कहा गया है कि, 'गंगा में स्नान करने और हरि का नाम जपने से धन और संतान की प्राप्ति होती है' और इसीलिए लोग ऐसे कार्यों में संलग्न होते हैं।
 
It is said in the Vedas that, 'bathing in the Ganga and chanting the name of Hari leads to the attainment of wealth and children' and that is why people engage in such activities.
तात्पर्य
सामान्य लोग यह सोचते हैं नहाने गंगा में और हरि नाम जपने से सांसारिक ऐश्वर्य और बड़ा परिवार मिल जाता है, इसलिए वेद को अपनी इंद्रिय तृप्ति में सहायक बताते हैं। किंतु गंगा स्नान और हरि नाम जप आदि कर्म करने से उनकी सहज प्रकृत का मैल दूर हो जाता है और प्रभु की सेवा की प्रवृत्ति जग जाती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)