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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 65
श्लोक
2.19.65
বিষয-সুখেতে বড লোকের সন্তোষ
চিত্ত বুঝিঽ কহে বেদ, বেদের কি দোষ
विषय-सुखेते बड लोकेर सन्तोष
चित्त बुझिऽ कहे वेद, वेदेर कि दोष
अनुवाद
लोग भौतिक सुखों में बहुत आनंद लेते हैं, और वेद उनकी मानसिकता के अनुसार दिशा-निर्देश देते हैं। वेदों का क्या दोष है?
People take great delight in material pleasures, and the Vedas provide guidance according to their mindset. What is the fault of the Vedas?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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