श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.19.64 
বেদে ও বুঝায ঽস্বর্গঽ, বলে জনা জনা
মূর্খ-প্রতি কেবল সে বেদের করুণা
वेदे ओ बुझाय ऽस्वर्गऽ, बले जना जना
मूर्ख-प्रति केवल से वेदेर करुणा
 
 
अनुवाद
“कुछ लोग दावा करते हैं कि वेदों में स्वर्ग लोक को जीवन का लक्ष्य बताया गया है, लेकिन ऐसी शिक्षाएं मूर्खों पर वेदों की दया मात्र हैं।
 
“Some people claim that the Vedas describe heaven as the goal of life, but such teachings are merely the Vedas' mercy on the foolish.
तात्पर्य
कर्म के फलस्वरूप धन जैसे फल प्राप्त होते हैं। यह भी सुना गया है कि पवित्र कार्यों के प्रभाव से स्वर्गीय सुख जैसे फल प्राप्त किये जा सकते हैं; और लालची, भौतिकवादी, अज्ञानी लोगों को उनकी प्रकृति को सुधारने के लिए निर्धारित वैदिक आदेशों से दया दिखाई गई है। इस सम्बन्ध में परोक्ष-वादो वेदो यं और लोके व्यवयायमिषम [परोक्ष-वादो वेदो यं बालानम अनुशासनम, कर्म-मोक्षाय कर्माणि विधत्ते ह्य अगदम यथा, “बाल और मूर्ख लोग भौतिकवादी, कार्यफल में लिप्त रहते हैं, हालाँकि जीवन का वास्तविक लक्ष्य ऐसी गतिविधियों से मुक्त होना है। इसलिए, वैदिक निषेधाज्ञा परोक्ष रूप से हमें परम मुक्ति का मार्ग प्रदान करते हैं, पहले धार्मिक गतिविधियों के फल को निर्धारित करके, जैसे एक पिता अपने बच्चे को कैंडी का वादा करता है ताकि बच्चा अपनी दवाई ले ले। (भाग. 11.3.44), लोके व्यवयायमिश-मद्य-सेवानित्या हि जन्त्रो ना हि तत्र चोदनाव्यवस्थितिषु तेषु विवाह-यज्ञ, सुरा-ग्रहैर आषु निवृतिर इष्टा, "इस भौतिक दुनिया में सशर्त आत्मा हमेशा सेक्स, मांस खाने और नशे की ओर प्रवृत्त होती है। इसलिए धार्मिक शास्त्र वास्तव में कभी भी ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहित नहीं करते हैं। यद्यपि पवित्र विवाह के माध्यम से यौन संबंध बनाने के लिए शास्त्रीय निषेधाज्ञा, बलिदान के माध्यम से मांस खाने के लिए और अनुष्ठान शराब के प्याले की स्वीकृति के माध्यम से नशे के लिए अनुमति प्रदान की जाती है, ऐसे समारोह त्याग के परम उद्देश्य के लिए हैं। (भाग. 11.5.11)]। परम प्रभु के प्रतिकूल लोग सांसारिक वस्तुओं के स्वामी बनने में बहुत आनंद लेते हैं। इसलिए वैदिक साहित्य प्रोत्साहन के विभिन्न रूप प्रदान करते हैं जो उनके स्वाद के अनुकूल हैं। फिर भी यह वेदों का वास्तविक उद्देश्य नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)