श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.19.61 
ধন-বṁশ-নিমিত্ত সṁসার কাম্য করে
বল তার ধন-বṁশ তবে কেনে মরে?
धन-वꣳश-निमित्त सꣳसार काम्य करे
बल तार धन-वꣳश तबे केने मरे?
 
 
अनुवाद
“यदि धन और परिवार ही जीवन का उद्देश्य हैं, तो मुझे बताइए कि मृत्यु के समय इन्हें क्यों छीन लिया जाता है?
 
“If wealth and family are the purpose of life, then tell me why are they taken away at the time of death?
तात्पर्य
"यदि मनुष्यों की इच्छा स्वाभाविक रूप से धन-दौलत और संतान जैसी भौतिक वस्तुओं को पाने की है, तो उनकी इच्छा के बावजूद वे धन-दौलत और संतान को छोड़ने को क्यों मजबूर हैं?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)