श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.19.6 
সবা হৈতে মত্ত বড আচার্য গোসাঞী
অগাধ চরিত্র, বুঝে হেন কেহ নাই
सबा हैते मत्त बड आचार्य गोसाञी
अगाध चरित्र, बुझे हेन केह नाइ
 
 
अनुवाद
सभी भक्तों में आचार्य गोसांईं परम आनंदित थे। कोई भी उनके अथाह गुणों को समझ नहीं पा रहा था।
 
Acharya Gosain was the most blissful of all devotees. No one could comprehend his immense qualities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)