श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.19.59 
ব্যপদেশে মহাপ্রভু সবারে শিখায
ভক্তি বিনা কেহ যেন কিছুই না চায
व्यपदेशे महाप्रभु सबारे शिखाय
भक्ति विना केह येन किछुइ ना चाय
 
 
अनुवाद
इस कार्य के द्वारा महाप्रभु ने सभी को भक्ति सेवा के अलावा किसी अन्य चीज़ की आकांक्षा न करने की शिक्षा दी।
 
By this act Mahaprabhu taught everyone not to aspire for anything other than devotional service.
तात्पर्य
इस लीला-सत्र में श्रीमान्‌ महाप्रभु ने भक्ति की महिमा और अन्य सर्व क्रियाओँ की ओछाई का स्पष्ट प्रदर्शन किया; और सबको यह उपदेश दिया कि उनके सिवाय और कुछ नहीं चाहना चाहिए। उपदेश-प्रसंग में उन्होंने भौतिक तुष्टि की कामनाओं का त्याग करने की शिक्षा दी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)