श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  2.19.57 
হৈল বা বিষ্ণু-ভক্তি তোমার শরীরে
ধন বিনা কি খাইবা, তাহা কহ মোরে”
हैल वा विष्णु-भक्ति तोमार शरीरे
धन विना कि खाइबा, ताहा कह मोरे”
 
 
अनुवाद
“मुझे बताओ, भले ही आप भगवान विष्णु के प्रति भक्ति रखते हों, लेकिन यदि आपके पास धन नहीं है तो आप क्या खाएंगे?”
 
“Tell me, even if you have devotion towards Lord Vishnu, what will you eat if you do not have money?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)