vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
»
श्लोक 54
श्लोक
2.19.54
সন্ন্যাসী বলযে,—“শুন ব্রাহ্মণ-কুমার
কেনে তুমি আশীর্বাদ নিন্দিলে আমার?
सन्न्यासी बलये,—“शुन ब्राह्मण-कुमार
केने तुमि आशीर्वाद निन्दिले आमार?
अनुवाद
संन्यासी ने कहा, "हे ब्राह्मणपुत्र, सुनो, तुम मेरे आशीर्वाद की निन्दा क्यों कर रहे हो?
The Sanyasi said, “O son of a Brahmin, listen, why are you criticizing my blessings?
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas