श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 47-48
 
 
श्लोक  2.19.47-48 
দেখিযা মোহন-মূর্তি দ্বিজের নন্দন
সর্বাঙ্গ-সুন্দর রূপ, প্রফুল্ল বদন
সন্তোষে সন্ন্যাসী করে বহু আশীর্বাদ
“ধন, বṁশ, সুবিবাহ, হৌ বিদ্যা লাভ”
देखिया मोहन-मूर्ति द्विजेर नन्दन
सर्वाङ्ग-सुन्दर रूप, प्रफुल्ल वदन
सन्तोषे सन्न्यासी करे बहु आशीर्वाद
“धन, वꣳश, सुविवाह, हौ विद्या लाभ”
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर के अत्यंत मोहक रूप, सुन्दर अंग और मुस्कुराते हुए मुख को देखकर संन्यासी ने अत्यन्त प्रसन्न होकर उन्हें अनेक प्रकार के आशीर्वाद दिए, "आप धन, परिवार, अच्छी पत्नी और विद्या प्राप्त करें।"
 
Seeing the extremely charming form, beautiful body and smiling face of Visvambhara, the Sanyasi became very happy and gave him many blessings, "May you get wealth, family, a good wife and knowledge."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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