श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.19.40 
নিত্যানন্দ সম্বোধিযা বলে বিশ্বম্ভর
“চল যাই শান্তিপুর—আচার্যের ঘর”
नित्यानन्द सम्बोधिया बले विश्वम्भर
“चल याइ शान्तिपुर—आचार्येर घर”
 
 
अनुवाद
नित्यानंद को संबोधित करते हुए विश्वम्भर ने कहा, "आओ हम शांतिपुर में अद्वैत आचार्य के घर चलें।"
 
Addressing Nityananda, Visvambhara said, "Let us go to the house of Advaita Acharya in Shantipur."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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