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श्लोक 2.19.40  |
নিত্যানন্দ সম্বোধিযা বলে বিশ্বম্ভর
“চল যাই শান্তিপুর—আচার্যের ঘর” |
नित्यानन्द सम्बोधिया बले विश्वम्भर
“चल याइ शान्तिपुर—आचार्येर घर” |
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| अनुवाद |
| नित्यानंद को संबोधित करते हुए विश्वम्भर ने कहा, "आओ हम शांतिपुर में अद्वैत आचार्य के घर चलें।" |
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| Addressing Nityananda, Visvambhara said, "Let us go to the house of Advaita Acharya in Shantipur." |
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