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श्लोक 2.19.28  |
এক-দিন নগর ভ্রমযে প্রভু রঙ্গে
দেখযে আপন-সৃষ্টি নিত্যানন্দ-সঙ্গে |
एक-दिन नगर भ्रमये प्रभु रङ्गे
देखये आपन-सृष्टि नित्यानन्द-सङ्गे |
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| अनुवाद |
| एक दिन भगवान नित्यानंद के साथ अपनी सृष्टि को देखते हुए आनंदपूर्वक नगर में विचरण कर रहे थे। |
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| One day the Lord was happily wandering around the city with Nityananda, looking at His creation. |
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