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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 273
श्लोक
2.19.273
অদ্বৈত-গৃহেতে প্রভু যত কৈল কেলি
ইহা যেই শুনে, সেই পায সেই মেলি
अद्वैत-गृहेते प्रभु यत कैल केलि
इहा येइ शुने, सेइ पाय सेइ मेलि
अनुवाद
जो कोई भी अद्वैत के घर में हुई लीलाओं को सुनेगा, वह ऐसी लीलाओं में सम्मिलित हो जाएगा।
Whoever hears the pastimes that took place in the house of Advaita will become involved in such pastimes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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