श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 268
 
 
श्लोक  2.19.268 
সবে করিলেন অদ্বৈতেরে নমস্কার
যার ভক্তি-কারণে চৈতন্য-অবতার
सबे करिलेन अद्वैतेरे नमस्कार
यार भक्ति-कारणे चैतन्य-अवतार
 
 
अनुवाद
सभी ने अद्वैत को प्रणाम किया, जिसकी भक्ति से भगवान चैतन्य अवतरित हुए।
 
Everyone bowed to Advaita, through whose devotion Lord Chaitanya appeared.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)