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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 261
श्लोक
2.19.261
চৈতন্য-প্রিযের পাযে মোর নমস্কার
ইহাতে যে অপরাধ ক্ষমহ আমার
चैतन्य-प्रियेर पाये मोर नमस्कार
इहाते ये अपराध क्षमह आमार
अनुवाद
मैं भगवान चैतन्य के प्रिय पार्षदों के चरणों में प्रणाम करता हूँ ताकि वे मेरे अपराधों को क्षमा कर दें।
I bow down at the feet of Lord Chaitanya's beloved associates so that they may forgive my transgressions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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