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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 260
श्लोक
2.19.260
এ-সব কথার নাহি জানি অনুক্রম
যে-তে-মতে গাই মাত্র কৃষ্ণের বিক্রম
ए-सब कथार नाहि जानि अनुक्रम
ये-ते-मते गाइ मात्र कृष्णेर विक्रम
अनुवाद
मुझे इन लीलाओं का क्रम नहीं पता। किसी न किसी तरह मैं बस कृष्ण की महिमा का गान कर रहा हूँ।
I don't know the sequence of these pastimes. I am simply singing the glories of Krishna, one way or another.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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