vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
»
श्लोक 257
श्लोक
2.19.257
হেন মতে মহাপ্রভু অদ্বৈত-মন্দিরে
স্বানুভাবানন্দে কৃষ্ণ-কীর্তনে বিহরে
हेन मते महाप्रभु अद्वैत-मन्दिरे
स्वानुभावानन्दे कृष्ण-कीर्तने विहरे
अनुवाद
इस प्रकार महाप्रभु अद्वैत के घर में कृष्ण की महिमा का आनंद लेते हुए अपनी परमानंद मनोदशा में लीन थे।
Thus Mahaprabhu was absorbed in His ecstatic state of mind, enjoying the glories of Krishna in the abode of Advaita.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×