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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 242
श्लोक
2.19.242
ভোজন হৈল পূর্ণ, কিছু মাত্র শেষ
নিত্যানন্দ হৈলা পরম বাল্যাবেশ
भोजन हैल पूर्ण, किछु मात्र शेष
नित्यानन्द हैला परम बाल्यावेश
अनुवाद
जब उन्होंने अपना भोजन लगभग समाप्त कर लिया तो नित्यानंद पूरी तरह से एक बच्चे की मनोदशा में लीन हो गए।
When he had almost finished his meal, Nityananda became completely absorbed in the mood of a child.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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