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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 234
श्लोक
2.19.234
উঠিঽ দেখিঽ ঠাকুর অদ্বৈত-পদ-তলে
আথে ব্যথে উঠিঽ প্রভু ঽবিষ্ণু বিষ্ণুঽ বলে
उठिऽ देखिऽ ठाकुर अद्वैत-पद-तले
आथे व्यथे उठिऽ प्रभु ऽविष्णु विष्णुऽ बले
अनुवाद
जब भगवान उठने लगे, तो उन्होंने अपने चरणकमलों में अद्वैत को देखा। वे तुरन्त उठ खड़े हुए और बोले, "विष्णु! विष्णु!"
When the Lord began to rise, he saw Advaita at His lotus feet. He immediately stood up and said, "Vishnu! Vishnu!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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