श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 227
 
 
श्लोक  2.19.227 
অদ্বৈত-গৃহিণী মহাসতী পতি-ব্রতা
বিশ্বম্ভর মহাপ্রভু যারে বলে ঽমাতাঽ
अद्वैत-गृहिणी महासती पति-व्रता
विश्वम्भर महाप्रभु यारे बले ऽमाताऽ
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर महाप्रभु अद्वैत की सबसे पवित्र पत्नी को “माँ” कहकर संबोधित करते थे।
 
Vishvambhara Mahaprabhu used to address the most pious wife of Advaita as “Mother”.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)