श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  2.19.225 
প্রভু বলে,—“শুন নিত্যানন্দ মহাশয
ক্ষমিবা চাঞ্চল্য যদি মোর কিছু হয”
प्रभु बले,—“शुन नित्यानन्द महाशय
क्षमिबा चाञ्चल्य यदि मोर किछु हय”
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, “सुनो, नित्यानंद महाशय, यदि मैं अशांत रहा हूँ तो कृपया मुझे क्षमा करें।”
 
The Lord said, “Listen, Nityananda Mahasaya, please forgive me if I have been disturbed.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)