श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 223
 
 
श्लोक  2.19.223 
ক্ষণেকেই বাহ্য-দৃষ্টি দিযা বিশ্বম্ভর
হাসিযা অদ্বৈত-প্রতি বলযে উত্তর
क्षणेकेइ बाह्य-दृष्टि दिया विश्वम्भर
हासिया अद्वैत-प्रति बलये उत्तर
 
 
अनुवाद
तब विश्वम्भर ने अद्वैत की ओर देखा और उससे बात करते हुए मुस्कुराये।
 
Then Vishvambhar looked at Advaita and smiled while talking to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)