श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.19.22 
হেন জ্ঞান না বুঝিযা কোন কোন জন
ঘরে ধন হারাইযা চাহে গিযা বন
हेन ज्ञान ना बुझिया कोन कोन जन
घरे धन हाराइया चाहे गिया वन
 
 
अनुवाद
“जो व्यक्ति इस ज्ञान को नहीं समझता, वह उस व्यक्ति के समान है जो अपना धन घर पर छोड़ देता है और फिर उसे जंगल में खोजता है।
 
“A person who does not understand this knowledge is like a person who leaves his money at home and then searches for it in the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)