श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.19.216 
অদ্বৈত কান্দযে দুই চরণে ধরিযা
প্রভু কান্দে অদ্বৈতেরে কোলেতে করিযা
अद्वैत कान्दये दुइ चरणे धरिया
प्रभु कान्दे अद्वैतेरे कोलेते करिया
 
 
अनुवाद
अद्वैत रो पड़ा और भगवान के दोनों चरण कमलों को पकड़ लिया। भगवान भी अद्वैत को गले लगाते हुए रोने लगे।
 
Advaita wept and held the Lord's lotus feet. The Lord also began to weep, embracing Advaita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)