श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 213
 
 
श्लोक  2.19.213 
বাহু তুলিঽ জগতেরে বলে গৌর-ধাম
“অনিন্দক হৈঽ সবে বল কৃষ্ণ-নাম
बाहु तुलिऽ जगतेरे बले गौर-धाम
“अनिन्दक हैऽ सबे बल कृष्ण-नाम
 
 
अनुवाद
अपनी भुजाएँ उठाकर भगवान गौरांग ने संसार से कहा, "अपराधों से दूर रहो और कृष्ण के नामों का जप करो!
 
Raising His arms, Lord Gauranga said to the world, “Refrain from sins and chant the names of Krishna!
तात्पर्य
दोष रहित होने पर भी दोषारोपण करना निंदा या “ईशनिंदा” कहलाता है। कृष्ण के नामों का जाप करते समय ईशनिंदा से अलग रहना अति आवश्यक होता है। जो लोग निंदा से मुक्त होते हैं, वे सर्वश्रेष्ठ होते हैं। जो अपने कर्मों के फल का भोग करने की इच्छा से रहित होता है, उसे संन्यासी कहा जाता है। यदि ऐसा संन्यासी भी जो निंदा से मुक्त है, वैसेव वैष्णव की निंदा करता है, तो त्याग और दूसरों के बारे में बात करने से परहेज करने के उसके सभी सिद्धांत नष्ट हो जाते हैं और वह पतन हो जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)