श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 212
 
 
श्लोक  2.19.212 
সন্ন্যাসী ও যদি অনিন্দক নিন্দা করে
অধঃ-পাতে যায, সর্ব ধর্ম ঘুচে তারে”
सन्न्यासी ओ यदि अनिन्दक निन्दा करे
अधः-पाते याय, सर्व धर्म घुचे तारे”
 
 
अनुवाद
“यदि कोई संन्यासी भी किसी निर्दोष व्यक्ति की निन्दा करता है, तो वह नरक में जाता है और उसके सभी धार्मिक सिद्धांत नष्ट हो जाते हैं।”
 
“If even a Sanyasi slanders an innocent person, he goes to hell and all his religious principles are destroyed.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)