श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  2.19.211 
তুমি তঽ আমার নিজ-দেহ হৈতে বড
তোমারে লঙ্ঘিলে দৈবে না সহযে দঢ
तुमि तऽ आमार निज-देह हैते बड
तोमारे लङ्घिले दैवे ना सहये दढ
 
 
अनुवाद
“आप मेरे अपने शरीर से भी अधिक महत्वपूर्ण हैं, इसलिए यदि कोई आपका उल्लंघन करता है, तो वह अपने भाग्य को सहन करने में असमर्थ होगा।
 
“You are more important than even my own body, so if someone violates you, he will be unable to bear his fate.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)